लेखसंपादकीय

क्या स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं भी छीन लेगी छत्तीसगढ़ की यह रमन सरकार ?

डॉक्टर राजू अग्रवाल – छत्तीसगढ़ की रमन सिंह सरकार ने जो नया पूंजीवादी निर्णय लिया है वह लोकतंत्र के लिए न केवल चिंताजनक है बल्कि स्वास्थ्यगत सुविधाओं को निजी क्षेत्रों को देने का एक ऐसा षड्यंत्रकारी प्रयास है जिसकी भारी कीमत आने वाले दिनों में आम जनता को चुकानी पड़ेगी।

अभी हाल में छत्तीसगढ़ के 9 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों जिनमें नया रायपुर,गुढ़ियारी, माना,मठपुरैना,कुरूद, मनेन्द्रगढ़, सुपेला, ख़ुरसीपार और भाटापारा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सी.एस.सी.)शामिल हैं उसे निजी सेक्टर को देने का निर्णय लिया गया है। इसके पीछे सरकार यह तर्क दे रही है कि लंबे समय से इन 9 सरकारी अस्पतालों (सी.एस. सी.)में स्टाफ की कमी सरकार पूरी नहीं कर पा रही है। एक चुनी हुई सरकार का ऐसा बयान न केवल लज्जाजनक है बल्कि गैर जिम्मेदाराना बयान भी है ।

सरकार का यह दायित्व है कि वह स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क,पानी,बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं आमलोगों को सहज एवम सरल उपलब्ध करवाए , इसी उम्मीद के साथ आम जनता किसी सरकार को चुनती है और यही लोकतंत्र की खूबसूरती है, पर धन्य है यह रमन सिंह सरकार जो कि लोकतंत्र की इसी आत्मा को नष्ट करके उसे मारने पर तुली हुई है । स्वतंत्रता प्राप्ति के उपरांत वसुधैव कुटुम्बकम की भावना से प्रेरित होकर चली आ रही कर ढाँचे की इस लोकतांत्रिक ख़ूबसूरती को ही छत्तीसगढ़ की रमन सरकार नेस्तनाबूद करने पर अब तुल गयी है।

ऐसे में अब सवाल यह उठने लगे हैं कि क्या देश के लोगों द्वारा अदा किए गए विभिन्न प्रकार के अरबों खरबों के टेक्स का उपयोग नेता अपनी अय्यासी ,सुख सुविधा, विदेश यात्रा और हवाई उडानों पर ही खर्च करेंगे और बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने वाले अस्पताल स्कूल जैसे संस्थानों को निजी हाथों में सौंप कर सरकारें अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त हो नाकारा होती चली जाएंगी ?


क्या सरकार का काम अब सिर्फ दारू का ठेका चलना,तिहार मनना, उद्घाटन करना ही रह गया है?
जब जनता की बुनियादी जरूरतें पूंजीपतियों को ही पूरा करना है तो फिर रमन सिंह जैसी सरकारों के रहने या न रहने का जनता के लिए क्या अर्थ रह जाएगा । सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के निजी हाथों में जाने के बाद इलाज बहुत महंगा हो जाएगा , स्मार्टकार्ड जो कि बीमा कम्पनियों, उद्योग पतियों को लाभ पहुँचाने का एक साधन भर रह जावेगा । हम सरकार के इस दमनकारी निर्णय का पुरजोर विरोध करते हैं, और रमन सिंह सरकार से जनहित में इस निर्णय को वापस लिए जाने की मांग करते है।

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