छत्तीसगढ़

सुनिश्चित जीत की ओर अग्रसर विजय अग्रवाल

खरसिया - सारंगढ़ व लैलूंगा में कांग्रेस को बढ़त के संकेत

धरमजयगढ़ सीट बचा पाएगी भाजपा की प्रतिष्ठा

दिनेश मिश्र – इसे मात्र संयोग कहें या कहीं इतिहास अपने-आप को दोहराने तो नहीं जा रहा ? रायगढ़ विधानसभा क्षेत्र से स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनावी समर में उतरे विजय अग्रवाल लगता है एक और कीर्तिमान रचने जा रहे हैं। कांग्रेस के अपराजेय समझे जाने वाले परंपरागत किले को ढहाने तथा अपने विधायकी कार्यकाल में रायगढ़ को अभूतपूर्व विकास की दहलीज पर पहुंचा देने जैसी दो अनुपम उपलब्धियां तो उनके खाते में दर्ज है ही; अबकी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल कर रायगढ़ के राजनैतिक इतिहास में एक नया कीर्तिमान जोड़ने की ओर अब अग्रसर हैं ।

विधानसभा चुनाव को अब महज़ चंद घंटे शेष रह गए हैं । स्वतंत्र होकर भी अपनी लोकप्रियता से दलीय प्रतिद्वद्वियों को पीछे छोड़ते हुए विजय अग्रवाल काफी आगे निकल चुके हैं । उनका चुनाव चिन्ह “टेलीविजन छाप” जनमानस में घर कर चुका है । हर किसी की ज़ुबान में आज विजय के नाम की ही चर्चा है ।

विधायक एवं सरकार की नाकामियों को छिपाने हेतु रायगढ़ में भाजपा मुद्दों से भाग रही है जबकि कांग्रेस अंतर्कलह से जूझते हुए अपने परंपरागत वोट बैंक को बचाने की जी-तोड़ कोशिश में लगी हुई है। निर्दलीय प्रत्याशी विजय अग्रवाल ने नामांकन रैली के साथ ही जो आरंभिक बढ़त हासिल कर ली थी उसे महिलाओं की स्कूटी रैली; बाइक रैली तथा महिलाओं की विशाल जनसंपर्क रैली के साथ बरक़रार रखे हुए हैं। धुआंधार जनसंपर्क व उम्दा भाषण शैली के जरिये विजय खंदक की लड़ाई के इस अंतिम दौर में भी अपने प्रतिस्पर्धियों से आगे दिखाई दे रहे हैं। यह आम धारणा बन चुकी है कि चुनावी मैच का फिनिशिंग स्ट्रोक्स उन्ही के बल्ले से निकलेगा ।

गौरतलब है कि कांग्रेस के अपराजेय किले को ध्वस्त कर विधायक निर्वाचित होने वाले विजय अग्रवाल का 2003 से 2008 तक का कार्यकाल बेहद सफल कार्यकाल रहा है । केलो बांध परियोजना; प्रदेश का सबसे लंबा सूरजगढ़-नदीगांव पुल; मेडिकल कॉलेज; जामगांव-महापल्ली रोड; सांकरा पुल; केलो नदी में चार अतिरिक्त पुल; पेयजल आवर्द्धन योजना; महिला समृद्धि बाजार; शहर में दो नए उद्यानों की स्थापना तथा शहर को जूटमिल से जोड़ने वाली रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण उनके कार्यकाल में हुए विकास का बेमिसाल उदाहरण है । उनके विकास दूत वाली छवि अब उनके प्रतिद्वंद्वियों पर भारी पड़ रही है । तटस्थ विश्लेषकों की राय में उनकी जीत असंदिग्ध है ।

इस चुनाव को लेकर रायगढ़ जिले की जो सियासी तश्वीर उभरकर सामने आ रही है उसके मद्देनज़र पांचों सीटों में स्थिति 3-1-1 की रहेगी । सारंगढ़; लैलूंगा तथा खरसिया में कांग्रेस की जीत के कयास लगाए जा रहे हैं जबकि धरमजयगढ़ भाजपा व रायगढ़ सीट निर्दलीय के खाते में जाने की अटकलें व्यक्त की जा रही है ।

सारंगढ़ में बहुजन समाज पार्टी के साथ त्रिकोणीय संघर्ष में विधायक केराबाई (भाजपा) के मुकाबले कांग्रेस उम्मीदवार उत्तरी जांगड़े की स्थिति मजबूत है । वैसे भी इस सीट से विधायक रिपीट नही होते । जिला बनाने के झूठे आश्वासन से छली गई यहां की जनता प्रदेश की सत्तारूढ़ भाजपा सरकार से बेहद नाराज भी है ।

खरसिया में कांग्रेस के उमेश पटेल का भाजपा के ओपी चौधरी के साथ कांटे का संघर्ष चल रहा है । अंतिम खंदक की लड़ाई में उमेश पटेल कांग्रेस के इस अभेद्य गढ़ को बचाने में सफल हो जायेगे; ऐसा प्रतीत होने लगा है । निर्विवाद व साफ-सुथरी छवि के चक्रधर सिदार ने लैलूंगा में भाजपा के उम्मीदवार सत्यानंद राठिया को मुश्किल में डाल दिया है । कांग्रेस प्रत्याशी चक्रधर सिदार को मिल रहे व्यापक जनसमर्थन से उनकी जीत के संकेत मिलने लगे हैं ।

धरमजयगढ़ एकमात्र ऐसी सीट है जहां भाजपा अपनी प्रतिष्ठा बचाने में सफल हो सकती है । यहां लीनव राठिया की टक्कर में कांग्रेस के लालजीत राठिया की स्थिति को कमज़ोर बताया जा रहा है । कुल मिलाकर जिले में भाजपा लगभग सुनिश्चित पराजय की कगार पर खड़ी है । यह देखना दिलचस्प होगा कि वह इन चंद घंटों में अपना प्रदर्शन सुधार पाती है अथवा क्रमशः नुकसान झेलते हुए और भी निचले पायदान पर चली जाती है ।

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