संपादकीय

चुनाव आते ही भाजपा को याद आये कार्यकर्ता

पार्टी पर पूंजीपतियों का कब्जा, हाशिये पर कार्यकर्ता

सौदान सिंह सहलायेंगे लुटे-पीटे कार्यकताओं की पीठ

दिनेश मिश्र/रायगढ़ – चुनावी वर्ष में प्रवेश करते ही भाजपा पुनः अपनी चौथी पारी की तैयारियों में जुट गयी है। विगत 14 वर्षों के शासन के दौरान भाजपा में कारोबारी नेताओं, कॉर्पोरेट प्रायोजकों व आर्थिक हितधारी अमीर समूहों का एक समानांतर तंत्र काबिज हो गया है। इस गठजोड़ ने आर्थिक संसाधनों का खुलकर उपयोग करते हुये चापलूस पी.आर.ओ., थिंक टैंक और मीडिया संगठनों का एक बड़ा नेटवर्क खड़ा कर लिया है तथा हर स्तर पर अपने जी हुज़ूरीयों को स्थापित करके पार्टी के भीतर अपनी पकड़ को मजबूत कर लिया है। बड़े नेताओं व अर्थजगत के खिलाड़ियों की इस कार्यशैली से जमीनी भाजपा कार्यकर्ता हाशिये पर चला गया है और बेचैन है। इस बेचैनी को बगावत में तब्दील होने से रोकने के लिए केंद्रीय नेतृत्व ने पार्टी अनुशासन के नाम पर पार्टी के भीतर पूरी ताकत का केंद्रीकरण कर लिया है। हर चुनाव से पहले इन उपेक्षित कार्यकताओं को क्रमबद्ध ढंग से दिखावटी सम्मान व भावनात्मक बातों का बुस्टर डोज़ दिया जाता है। फिर बड़े ही शातिराना ढंग से इन राजनैतिक गदहों के सामने गाजर लटकाकर इन पर सवारी की जाती है। सत्र 2008 और 2013 में भाजपा कार्यकर्ताओं पर इस ठगी योजना का सफल प्रयोग करने के बाद मिशन 2018 हेतु पुनः इस योजना को लेकर राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री सौदान सिंह, संघ के नेता रामलाल व केंद्रीय प्रभारी अनिल जैन प्रदेश में कार्यकर्ताओं की क्लास लगा रहे हैं।

कार्यकर्ताओं को रिझाने की शातिराना चाल :-

जानकार सूत्र बताते हैं कि इस तरह की क्लास में बार-बार छले जाने से नाराज कार्यकर्ताओं की आत्मतुष्टि हेतु कई तरह के हथकंडों का योजनाबद्ध ढंग से प्रयोग किया जाता है। सूत्रों के अनुसार पहली कड़ी में जिले के सक्षम जनप्रतिनिधियों व बड़े पदाधिकारियों को छोटे कार्यकर्ताओं के समकक्ष बिठाकर उनकी आत्मतुष्टि की जाती है। फिर जिले के इन नेताओं के सामने ही उनके खिलाफ शिकायतों के लिये छोटे कार्यकर्ताओं को अवसर देकर उन्हें उकसाया जाता है और कार्यकर्ताओं की उपेक्षा को लेकर प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से जिले के नेताओं को झिड़की लगायी जाती है। इस पूरे उपक्रम से असंतुष्ट कार्यकर्ता के आहत मन को ठंढा कर लेने के बाद कार्यकर्ताओं के महत्व का गुणगान करते हुए कहा जाता है कि
सत्ता की जिस कुर्सी पर बैठकर नेतागण इतरा रहे हैं वह इन कार्यकर्ताओं की अथक मेहनत व त्याग के परिणाम स्वरूप उन्हें नसीब हुई है।

कार्यकर्ता पार्टी के रीढ़ की हड्डी है।

हम कार्यकर्ताओं की आंख से देखते हैं और उनके कान से सुनते हैं। वह सत्ता और जनता को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी है।

भाजपा केवल एक दल नहीं वरन एक वृहत परिवार है। कार्यकर्ता इस परिवार का सम्माननीय सदस्य है।

केवल भाजपा में ही पन्ना प्रभारी भी प्रधानमंत्री बन सकता है।

कार्यकर्ता अपनी भड़ास निकालकर हल्का हो जाने के बाद आला नेताओं से इतनी प्रशंसा सुनकर अपनी समस्त नाराजगी भूल जाता है और अपने महत्वपूर्ण होने के स्वप्नलोक में पहुंच जाता है।
आला नेता समझ जाते हैं कि अब वह आदेश सुनने के लिये तैयार हो चुका है। यहीं से असली खेल शुरू होता है। उन्हें सरकार की उपलब्द्धियाँ बतायी जाती है। यह भी बताया जाता है कि पार्टी की सरकार है इसीलिये पटवारी, मास्टर, पुलिस का सिपाही व सामान्यजन उन्हें नमस्कार करते व सम्मान देते हैं। अतः शिकायती होने की बजाय उन्हें पार्टी का शुक्रगुजार होना चाहिये। अंत में जो चुनावी असफलताएं रह गयी हों, उसके लिए पूरजोर मेहनत करके पुनः सरकार बनाने का संकल्प दिलवाया जाता है। थोड़े बहुत फेरबदल के साथ कमोबेश यही शातिराना तरीका प्रायः प्रत्येक चुनाव से पहले अपनाया जाता है। जिले स्तर पर सौदान सिंह द्वारा यहां से शुरुआत करने के बाद रामलाल संभाग स्तर पर चुनिंदा नेताओं की क्लास लेते हैं, फिर राज्य स्तर पर राष्ट्रीय प्रभारी अथवा राष्ट्रीय अध्यक्ष की क्लास होती है।
फिर जिले में कार्यकर्ता सम्मेलन, कार्यकर्ता सम्मान आदि के जरिये कार्यकर्ताओं को रिझाया जाता है ताकि चुनाव आते -आते ये कोल्हू के बैल पुनः एक बार जुताई के लिए तैयार हो जायें।

क्या सौदान सिंह से होगी दो टूक बात या फिर ठगे जायेंगे भाजपाई ? :-

इस कड़ी में सौदान सिंह 19 तारीख को रायगढ़ जिले की बैठक लेने हेतु पधार रहे हैं। रायगढ़ में एक विधायक समर्थित भाजपा है और दूसरी संगठन भाजपा है। बताया जा रहा है कि बैठक को लेकर दोनों भाजपा समूहों में भारी खींचतान चल रही है। बैठक में शामिल होने योग्य लोगों की सूची बनाने को लेकर विवाद की स्थिति निर्मित होने की अटकलें लगायी जा रही हैं। सौदान सिंह से स्थानीय विधायक की नजदीकियों का हवाला देकर विधायक समर्थित भाजपाई आश्वस्त हैं कि कोई कितना भी प्रयास कर ले, होगा वही जो उनका खेमा तय करेगा। आगामी चुनाव में टिकिट हेतु अपने नंबर बढ़ाने हेतु कुछ रायगढ़िया नेता अपनी-अपनी दावेदारी पेश करने की रणनीति बनाने में भी जुट गये हैं।

सार बात यह है कि भाजपा कार्यकर्ताओं को पुनः एक बार रिझाने व चुनावी उपयोग हेतु उन्हें झोंकने की तैयारियों में लग गयी है। देखना यह है कि विपक्ष में रहते हुये अपनी संघर्ष क्षमता से सत्ता की नींव हिला देने वाले भाजपा के लड़ाके 14 वर्षों से लगातार ठगे जाने के बावजूद फिर से एक बार आलकामान की शातिराना चाल के झांसे में आते हैं अथवा पहले 14 वर्षों के शोषण का हिसाब मांगते हुए अपना मुखर विरोध दर्ज कराते हैं। वैसे राजनैतिक क्षेत्र में तो यह माना जाता है कि मुखर प्रतिरोध ही अधिकार प्राप्ति का सम्मनजनक रास्ता है।

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