छत्तीसगढ़

किताबों से जीवन का पुनर्निमाण

रूसेन कुमार – किताब पढ़ने के महत्व के बारे में जितना भी कहा जाए, उतना ही कम है। और जितनी किताबें पढ़ी जाए, उतना ही कम है। काश हमारे पास अधिक से अधिक किताबों को पढ़ने के लिए इतनी फुरसत होती और वक्त होता ! किताबों के बिना जीवन का पुनर्निमाण असम्भव है। निरंतर किताबों के अध्ययन से समाज और देश-दुनिया को देखने के लिए एक अनोखा नजरिया मिलता है। जीवन में सीखने का क्रम निरंतर जारी रहता है। मनुष्य जीवन भर कुछ न कुछ सीखते रहता है। सीखने के क्रम में किताबों की भूमिका और उपयोगिता अद्वितीय और अतुलनीय है। जब हम निरंतर पढ़ते रहते हैं तो ही हमारे भीतर क्या श्रेष्ठ छुपा है, उसके बारे में बोध होता है और फिर उसे बाहर लाने की तैयारी होती है। तो क्यों नहीं हम अपने जीवन में पढ़ने की आदत विकसित करें ज्ञानियों ने हमारे लिए श्रेष्ठ ज्ञान को किताबों के माध्यम से सहेज कर रखा है।

हम सब की चाह होती है कि हमारे जीवन जीने के स्तर में निरंतर सुधार होता रहे। जीवन को अच्छे से अच्छा बनाने में सबसे ज्यादा योगदान अगर किसी का होता है, तो वह है किताबें, जिन्हें हमने कभी न कभी पढ़ा हुआ होता है। हमने कुछ भी श्रेष्ठ सीखा है, वह पुस्तकों का सहारा लेकर ही सीखा है। चाहे वह विद्यार्थी जीवनकाल में पाठ्यपुस्तकों के माध्यम से हो या फिर शेष जीवन में विविध किताबों के पढ़ते रहने की आदत के परिणाम स्वरूप। हम सभी को जीवन भर श्रे्ष्ठ बातों को सीखते रहना चाहिए। अपने घर में, माता-पिता से, परिजनों से, कार्यों से, अपने समाज, बुर्जुगों और गुरुजनों से। अपनी गलतियों से और अपनी सफलताओं से। छोटी से छोटी और श्रेष्ठ बातों को हम किताबों के माध्यम से जल्द ही सीख लेते हैं।

किताबें हमें सिखाती हैं और हमारे जीवन को संवारती हैं। एक ऐसी इनसानी दुनिया की कल्पना कीजिए, जहां किताबें और शिक्षा न हो। यह असंभव है। सभ्य समाज में जितनी ज्यादा लोगों द्वारा जितनी ज्यादा किताबें पढ़ीं जाएंगी, उतना ही समाज और राष्ट्र प्रगतिशील होगा।

किताबें हमारे जीवन में, अनेक रूपों और स्वरूपों में अतुलनीय भूमिका निभाती हैं। कभी यह एक सच्ची मार्गदर्शक बन जाती है तो यह कभी एक अच्छे मित्र की भांति हमारे साथ रहती है। कभी यह हमें हताशा से उबार लेती हैं तो कभी सफलता की ऊंचाईयों पर पहुंचने में मदद करती हैं। कभी यह जीवन को नया मकसद प्रदान करने में मददगार होती हैं तो कभी आगे बढ़ने के लिए सौहला और सहारा देती हैं। निरंतर अध्ययनशील रहने के फायदे अनगिनत हैं। पढ़ना हमेशा लाभदायक होता है। किताबें अक्सर हमें और हमारे दुःख और सुख को समझ लेती हैं और हमारी दुनिया को ज्यादा खूबसूरत बनाती हैं।

दरअसल हमें भारत को अध्ययनशील समाज बनाना है। आज हम कहीं भी जाएं, चाहे रेल्वे स्टेशन हो, रेल में सफर हो, या एयरपोर्ट में यात्रीगण हों, बमुश्किल ही लोग, किताब पढ़ते नजर आएंगे। यह कतई उचित तर्क नहीं है कि किताब पढ़ने के लिए बहुत फुरसत चाहिए। किताब कहीं पर भी पढ़ी जा सकती है। जब हम कोई किताब पढ़ते हैं तो दुनिया में शांति और सौहार्द्र स्थापित करने में महान योगदान देते हैं। जब हम कोई किताब पढ़ते हैं अध्ययनशील भारत बनाने में अद्भुत योगदान देते हैं। तो क्यों नहीं हम, अपने घर, परिवार, आसपास और समाज में किताब पढ़ने के महत्व के बारे में जागरुकता फैलाएं।

मेरी नवीनतम किताब – कब पढ़ेंगे आप – किताबों और उसे पढ़ने के महत्व के बारे में जनमानस में जागरुकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इसकी सैकड़ों प्रतियां बिक रही हैं और सराही जा रही है। अक्सर हम अपने समाज में बच्चों के बारे में कहते हैं कि वे पढ़ने के बारे में उत्साहित नहीं होते। बच्चा ही क्यों, अगर कोई वयस्क व्यक्ति भी पढ़ने के महत्व के बारे में जागरुक नहीं है, इस किताब को उसे पढ़ने को अवश्य देनी चाहिए। युवाओं को मेरा संदेश है कि वे किताबों के माध्यम से जीवन का नवनिर्माण करें।

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